28 अप्रैल 1858 बावली इमली की कहानी

देश की आजादी में बहुत सारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जिंदगियों को न्योछावर कर दिया। इनके प्रतीक चिह्न आज भी कई जगह उपस्थित हैं। जो वीर सपूतों की गाथा बयां कर रहे हैं। इन्ही में एक है 'बावनी इमली'। यह पेड़ आजादी की जंग में शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों का गवाह रहा है।
 उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी तहसील के खजुहा कस्बे में स्थित 'बावनी इमली' शहीद स्थल ऐतिहासिक रूप से काफी समृद्ध है। इस स्थल का अपना इतिहास और महत्त्व दोनों ही अलग हैं। इस स्थल का देश के क्रांतिकारियों से खास नाता है। खजुहा ब्लॉक के कस्बा स्थित शहीद स्थल 'बावनी इमली' का पेड़ जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी की दूरी पर स्थित है। दरअसल, यह इमली का पेड़ देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से हुए स्वतंत्रता संग्राम का गवाह रहा है। 1857 में पूरे देश में फिरंगी देशभक्तों पर कहर बरपा रहे थे और उनपर ज़ुल्म किया जा रहा था।

अंग्रेजों को खदेड़ने का संकल्प लिया
ऐसे ही हालात उस दौर में फतेहपुर जिले का भी था। यहां भी अंग्रेजों ने लोगों का जीना कठिन कर दिया था। इससे परेशान लोगों ने ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध संकल्प लिया कि फिरंगियों को देश से हर हाल में खदेड़ना है चाहे इसके लिए जिंदगी ही क्यों ना न्योछावर करनी पड़े। बावनी इमली का अपना अलग ही इतिहास और महत्व है। इसके पीछे एक लंबी कहानी है। बात 1857 के दौर की है, अंग्रेजों के अत्याचारों से लोग परेशान थे। तभी खजुहा ब्लॉक के रसूलपुर गांव निवासी देशभक्त और महान स्वतंत्रता सेनानी ठा.जोधा सिंह अटैया ने ब्रिटिश सेना की नीद उडा कर रखी थी। लोगों को एकत्रित कर उनमें देश भक्ति की भावना भी जगा रहे थे। ठाकुर जोधा सिंह के नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध कई बड़े कारनामों को अंजाम दिया गया।

52 क्रांतिकारियों को दी गई फांसी

इससे परेशान अंग्रेजों ने उन्हें जान से मारने की रणनीति बनाई। 28 अप्रैल 1858 को जोधा सिंह अपने 51 साथियों के साथ लौट रहे थे। मुखबिर ने इसकी सूचना अंग्रेज अफसरों को दे दी। अंग्रेजों ने चारों तरफ से घेरकर धोखे से इन 52 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद अंग्रेजों ने इसी इमली के पेड़ पर इन सभी क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया। तभी से इसे बावनी इमली शहीद स्थल के नाम से जाना जाता है। इमली के पेड़ को शहीद स्थल के रूप में विकसित किया गया है। पेड़ के चारों तरफ गोलाई में दीवार बनी है, उसके नीचे स्मारक बना है। लोग फूल मालाओं से शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं।

52 शहीदों के नाम और पते दर्ज हैं
यहीं पर कई मीटर ऊंचा स्तभ बना है। इसपर देश के लिए जान न्योछावर करने वाले वीर सपूतों की गाथा लिखी है। वहीं पेड़ के सामने 3 स्तंभ भी बने हैं, जिस पर शहीद होने वाले सभी 52 लोगों के नाम और पते दर्ज हैं। वहीं इस स्थल पर महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद ठाकुर जोधा सिंह अटैया की विशाल प्रतिमा लगी है। साथ ही स्वतंत्रता सेनानी जोधा सिंह के बारे में विस्तृत जानकारी भी लिखी गई है।

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