महिला शक्ति
भारत वर्ष एक सम्पन्न परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से समृद्ध देश है, जहां महिलाओं का समाज में प्रमुख स्थान रहा है। ग्रामीण परिदृश्य में महिलाओं की बड़ी आबादी है। दुर्भाग्यवंश विदेशी शासनकाल में समाज में अनेक कुरीतियां व विकृृतियां पैदा हुई, जिससे महिलाओं को उत्पीड़न हुआ।
आजादी के बाद महिलाओं का समाज में सम्मान बढ़ा, लेकिन उनके सशक्तिकरण की गति दशकों तक धीमी रही। गरीबी व निरक्षरता महिलाओं की प्रगति में गंभीर बाधा रही हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल के माध्यम से महिलाओं को व्यवसाय की ओर प्रोत्साहित कर इन्हे आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया जा सकता है। विशेषकर कृषि प्रसंस्करण उद्योगों, बैंकिंग सेवाओं और डिजिटलीकरण की सहायता से महिलाओं के सामाजिक और वित्तीय सशक्तिकरण की शुरुआत की जा सकती है।
भारतीय महिलाएं ऊर्जा से लबरेज, दूरदर्शिता, जीवन्त उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ सभी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हंै। भारत के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के शब्दों में, हमारे लिए महिलाएं न केवल घर की रोशनी हैं, बल्कि इस रौशनी की लौ भी हैं। अनादि काल से ही महिलाएं मानवता की प्रेरणा का स्रोत रही हैं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले तक, महिलाओं ने बड़े पैमाने पर समाज में बदलाव के बडे़ उदाहरण स्थापित किए हंै।
महिलाओं में जन्मजात नेतृत्व गुण समाज के लिए संपत्ति हैं। हमारी संस्कृति मे मां को प्रथम गुरु कहा गया है और हमारी मान्यता है कि जब आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं, तो आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं। जब आप एक महिला को शिक्षित करते हैं तो आप एक पीढ़ी को शिक्षित करते हैं।
नेतृत्व क्षमता और महिला सशक्तिकरण की बात करें तो हमें भारत के इतिहास से लेकर वर्तमान तक बहुत से ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां पर महिलाओं ने अपने क्षेत्र में एक विशेष महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उदाहरणार्थ
अहिल्याबाई ने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर भारत-भर के प्रसिद्ध तीर्थों और स्थानों में मन्दिर बनवाए, घाट बँधवाए, कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया, मार्ग बनवाए-काशी विश्वनाथ में शिवलिंग को स्थापित किया, भूखों के लिए अन्नसत्र (अन्यक्षेत्र) खोले, प्यासों के लिए प्याऊ बिठलाईं, मन्दिरों में विद्वानों की नियुक्ति शास्त्रों के मनन-चिन्तन और प्रवचन हेतु की।
रानी लक्ष्मीबाई ने 187 के स्वतंत्रता संग्राम मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
सावित्रीबाई फुले के प्रयासों से भारत में पहली बार महिला शिक्षा की नीव रखी गई ओर इसको नई दिशा दी गई।
डा रखमाबाई राऊत भारत की प्रथम महिला चिकित्सक थीं। वह एक ऐतिहासिक कानूनी मामले के केंद्र में भी थीं, जिसके परिणामस्वरूप एज ऑफ कॉन्सेंट एक्ट, 1891 नामक कानून बना।
ताराबाई शिंदे एक नारीवादी कार्यकर्ता थी, जिसने 19 वीं सदी के भारत में पितृसत्ता और जाति का विरोध किया था। वह अपने प्रकाशित काम, स्त्री-पुरुष तुलना ("महिलाओं और पुरुषों के बीच एक तुलना"), मूल रूप में 1882 में मराठी में प्रकाशित के लिए जानी जाती है।
ये तो वो शक्तियां जिन्होंने अतीत मे नेतृत्व किया वर्तमान भारत मे भी नारी शक्ति सब पर भारी है चाहे फिर वह महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू हो वित मंत्री निर्मला सीतारमण हो ।
इनके नेतृत्व के साथ भारत मे विभिन्न क्षैत्रो मे महिलाए बुलंदियों का परचम लहरा रही है
भारत में कई प्रभावशाली महिलाएं हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है। इनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं:
अंशुला कांत विश्व बैंक की एमडी और सीएफओ
अनु ऐयंगर जेपी मॉर्गन की मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल हेड।
सवित्री जिंदल जिंदल ग्रुप की चेयरपर्सन, जिनकी नेट वर्थ 39.5 बिलियन डॉलर है।
रेखा झुनझुनवाला टाइटन कंपनी लिमिटेड की निवेशक, जिनकी नेट वर्थ 8.7 बिलियन डॉलर है
सुधा मुर्ति Infosys की मालिक और राज्य सभा सांसद जिनका राज्य सभा मे पहला भारत प्रत्येक भारतीय को प्रभावित करने वाला था ।
माधवी पुरी बुच सेबी की वर्तमान प्रमुख सेबी की वर्तमान प्रमुख माधबी पुरी बुच हैं वह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की पहली महिला अध्यक्ष हैं और उनकी नियुक्ति 2022 में हुई थी। माधबी पुरी बुच के नेतृत्व में, सेबी भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के हितों की रक्षा और प्रतिभूति बाजार के विकास के लिए काम कर रही है।
रोशनी नादर भारत की पहली महिला जो एक सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली आईटी कंपनी की प्रमुख बनीं।
प्रेवीना राय: एनपीसीआई की सीओओ
खेल में प्रभावशाली महिलाएं:
पैरा आल्मपिक में भारतीय महिलाओं का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है।
अवनि लेखरा ने पैरालंपिक इतिहास में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रच दिया । उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 शूटिंग स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ अपने खिताब को डिफेंड किया।
प्रीति पाल ने महिलाओं की 100 मीटर T35 दौड़ में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ कांस्य पदक जीता। यह पैरालंपिक के ट्रैक इवेंट में भारत का पहला पदक था।
दीप्ति जीवनजी भी महिलाओं की 400 मीटर T20 वर्ग में कांस्य के साथ पैरालंपिक पदक जीतने वाली पहली बौद्धिक रूप से कमजोर भारतीय एथलीट बनीं।
शीतल देवी ने तीरंदाजी मे अपनी छाप छोड़ी, जो महज 17 साल की उम्र में राकेश कुमार के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य हासिल करके भारत की सबसे कम उम्र की पैरालंपिक पदक विजेता बन गईं।
सिमरन महिलाओं की 200 मीटर T12 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता. यह इस श्रेणी में भारत का पहला पदक था।
थुलसिमति मुरुगेसन
पैरा-बैडमिंटन में महिला एकल SU5 में रजत पदक जीतकर खेल में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महिलाओं की भूमिका वर्तमान में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाएं नए आयाम स्थापित कर रही हैं और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।कुछ प्रमुख क्षेत्र जहां महिलाएं अपनी छाप छोड़ रही हैं:
अतरिक्ष अनुसंधान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और मंगल मिशन जैसी परियोजनाओं में शामिल हैं।
चिकित्सा विज्ञान : महिलाएं चिकित्सा विज्ञान में नए आयाम स्थापित कर रही हैं और नए उपचार विकसित कर रही हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी महिलाएं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं और नए सॉफ्टवेयर विकसित कर रही हैं।
पर्यावरण विज्ञान महिलाएं पर्यावरण विज्ञान में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर काम कर रही हैं।
कुछ प्रमुख महिलाएं जिन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपनी छाप छोड़ी है:
कल्पना चावला भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जिन्होंने नासा के लिए काम किया।
इंदिरा मित्रा भारतीय वैज्ञानिक जिन्होंने कैंसर के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
श्रीमती यशोदा थाकोर*श भारतीय वैज्ञानिक जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
न्यायपालिका जस्टिस इंदु मल्होत्रा भारत की सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश थीं ।
सेना मिट्टल पटेल भारतीय वायु सेना में पहली महिला फाइटर पायलट हैं ।
नौसेना प्रिया जयराजन भारतीय नौसेना में पहली महिला पायलट हैं ।
पुलिस: किरण बेदी भारतीय पुलिस सेवा में पहली महिला अधिकारी हैं
डिव्या अजीत कुमार भारतीय थलसेना में पहली महिला जज एडवोकेट जनरल बनी।
वतर्मान मे ही जोधपुर जिले के इंद्रोका गाव की बेटी प्रेरणा सिंह खीची सेना मे लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर पदोन्नत हुई है।
वर्तमान भारत मे महिला सशक्तिकरण के विषय पर दो प्रभावशाली व्यक्तियों का मत जानना बहुत जरूरी है इसमे सबसे पहले है भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी महिला शक्ति पर प्रधानमंत्री मोदी जी के विचार बहुत प्रेरक हैं। उनका मानना है कि किसी भी देश की तरक्की तभी संभव है जब उसकी आधी आबादी, यानी महिला शक्ति, की भागीदारी बराबर हो। वे महिलाओं की उन्नति और सशक्तिकरण को भारत के विकास की कुंजी मानते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने कई योजनाएं शुरू की हैं जो महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद कर रही हैं। उनके विचारों में महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के सपनों को पूरा करने की भी बात शामिल है। वे गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए बड़े फैसले ले रहे हैं।
दुसरे है भारत के सबसे बडे संगठन के मुख्या
मोहन भागवत,जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक, महिला शक्ति पर अपने विचारों में बहुत स्पष्ट हैं। उन्होंने महिलाओं की भूमिका को समाज में महत्वपूर्ण माना है और उनके सशक्तिकरण पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज की रीढ़ हैं और उनकी भागीदारी के बिना समाज की तरक्की नहीं हो सकती।
भागवत जी ने यह भी कहा है कि महिलाओं को समाज में समान अधिकार मिलने चाहिए और उनकी सुरक्षा के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण माना है।और साथ ही महिलाओं के प्रति होने वाले भेदभाव के खिलाफ भी आवाज उठाई है। उन्होंने कहा है कि समाज में महिलाओं के प्रति होने वाले भेदभाव को दूर करने के लिए हमें मिलकर काम करना चाहिए। कुल मिलाकर, मोहन भागवत जी के विचार महिला शक्ति के प्रति सम्मान और समर्थन को दर्शाते हैं।
अतः 2047 तक पृथ्वी को मानवता के लिए स्वर्ग समान जगह बनाने के लिए भारत को विकसित भारत बनाने के लिए भारत सतत विकास लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ चला है। लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण करना सतत विकास लक्ष्यों में एक प्रमुखता है। वर्तमान में प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, समावेशी आर्थिक और सामाजिक विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान दिया गया है। जो आने वाले भविष्य के लिए नीव का पत्थर का कार्य करेगा।
देवेन्द्र ‘देव’✍️
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