नवरात्रि
#घटस्थापना #नवरात्रि_महोत्सव
------सास्कृतिक वैज्ञानिक और प्राकृतिक महत्व--------------
कलश को सुख- समृद्धि, ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु, गले में रुद्र, मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्रि के समय ब्रह्मांड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है। इससे घर की सभी विपदादायक तरंगें नष्ट हो जाती हैं तथा घर में सुख-शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।
नवरात्रि का महत्व सिर्फ धर्म, अध्यात्म और ज्योतिष की दृष्टि से ही नहीं है बल्कि #वैज्ञानिक दृष्टि से भी नवरात्रि का अपना महत्व है। ऋतु बदलने के लिए समय रोग जिन्हें आसुरी शक्ति कहते हैं उनका अंत करने के लिए हवन, पूजन किया जाता है जिसमें कई तरह की जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों का प्रयोग किया जाता है। हमारे ऋषि मुनियों ने न सिर्फ धार्मिक दृष्टि को ध्यान में रख कर नवरात्रि में व्रत और हवन पूजन करने के लिए कहा है बल्कि इसका वैज्ञानिक आधार भी है। नवरात्रि के दौरान व्रत और हवन पूजन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही बढिय़ा है। इसका कारण यह है कि चारों नवरात्रि ऋतुओं के संधिकाल में होते हैं यानी इस समय मौसम में बदलाव होता है जिससे शारीरिक और मानसिक बल की कमी आती है। शरीर और मन को पुष्ट और स्वस्थ बनाकर नए मौसम के लिए तैयार करने के लिए व्रत किया जाता है।
सनातन संस्कृति की एक ओर विशेषता जिसमे इस सृष्टि का महत्वपूर्ण अंग मातृ शक्ति को कन्या के रूप मे पूजने की व्यवस्था है जो सीधे रूप मे संस्कृति मे मातृ शक्ति की महत्ता को दर्शाता है ओर शास्त्रों मे भी तो कहा गया है #यत्र_नार्यस्तु_पूज्यन्ते_रमन्ते_तत्र_देवता
जहा पर नारी परिवार मे माॅ बहन बेटी पत्नी के रूप मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है वही धर्म शास्त्रों मे दुर्गा माॅ सरस्वती माँ लक्ष्मी माॅ के रूप मे पूजी जाती है
वही दुसरी ओर इस मान्यता के लोगो द्वारा नारी को शोषित प्रताड़ित व नारी को कुचला जाता है तो कही किसी समाज मे मात्र भोग की वस्तु समझ कर उसको दबाकर रखा जाताहै जिसके पास कोई अधिकार नही है
#सोचना_हमे_है_हमे_किस_ओर_चलना_है
#बेटी_बचाओ_बेटी_पढाओ_बेटी_है_तो_कल है।
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