परिवर्तन ही विश्व गुरु बनाने का मार्ग


जब हम एक भव्य महल बनाते हैं तो कुछ समय बाद उसमें जरुरत के अनुसार कई प्रकार के परिवर्तन के साथ पुराने हो चुकी निर्माण सामग्री को परिवर्तित करना पड़ता है क्योंकि यह समय की मांग है  ठीक उसी को देखते हुए देश काल और परिस्थिति के अनुसार विराट देश को चलाने के लिए भी निश्चित समय अंतराल के बाद कुछ परिवर्तन किये जाने स्वभाविक है यदि हम भारत को विश्वगुरु कि पथ पर लाना चाहते हैं तो अब यह समय आ गया है जब कुछ बुनियादी परिवर्तन कर भारत को उस और अग्रसित करें क्योंकि हमको पता है कि परिवर्तन संसार का नियम है 
आजादी के इतने वर्षो बाद भी भारत आज उन अंग्रेजी कानूनों को ढोया जा रहा है जो भारतीयों को गुलाम बनाने के लिए बनाया गए थे उनमें कुछ बदलाव किए हैं लेकिन जब तक उनमें बुनियादी बदलाव नहीं होंगेओर जब तक समाज मे जमा खोरी   मुनाफाखोरी  और नौकरशाही समाज में हावी है जोकि गुलाम मानसिकता को दर्शाती है तब तक  क्रांतिकारी ‌परिवर्तन नहीं आ सकते 
परिवर्तन लाने के लिए मौजूदा 222 अंग्रेजी कानूनों को बदलना बेहद जरुरी है जैसे

एक देश-एक पाठ्यक्रम एक देश-एक शिक्षा बोर्ड
एक देश-एक दंड संहिता एक देश-एक कर संहिता
एक देश-एक पुलिस संहिता एक देश-एक मजदूर संहिता
एक देश-एक न्यायिक चार्टर एक देश-एक सिटीजन चार्टर
एक देश-एक नागरिक संहिता एक देश-एक चिकित्सा संहिता
इनके अतिरिक्त भ्रष्टाचार जोकि मूल कारण है घुसपैठ का उस पर कठोर कानून बनाने की आवश्यकता है
जिस प्रकार मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण है संविधान का मतलब सबके लिए समान विधान वेयर मंदिरों के अतिरिक्त मस्जिद गुरुद्वारे और विजय ग्रुप पर सरकार का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए
बढ़ती जनसंख्या और जनसंख्या विस्फोट को देखते हुए कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून की भी आवश्यकता है
आजादी के 74 साल बाद भी भारत आज भी अंग्रेजों के बनाए हुए कानूनों पर चल रहा है कानून बनता नोट और वोट के लिए है बदला भी नोट और वोट से जाता है नोट और वोट के लिए कोर्ट के फैसले को भी बदला जाता है अंग्रेजी कानून की सहायता से पार्टियों को नोट मिलते हैं इसलिए यह आज तक चल रहे हैं अब समय आ गया है भारत में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के लिए और भारत को विकास के पथ पर आगे प्रशस्त करने के लिए इनका परिवर्तन जरूरी है




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