बदलता मानसून बदलती तस्वीर

भारत में राजस्थान प्रदेश एक ऐसा प्रदेश है जहां पर विभिन्न प्रकार की भौगोलिक परिस्थितियां पाई जाती है कहीं पर सुदूर रेगिस्तान तो कई हरि भरी पहाडयुक्त जल से अलंकृत भूमि है हालांकि यह राजस्थान का एक गौरवशाली गुण रहा है कि यहां पर पग पग पर भौगोलिक परिस्थितियों से लेकर संस्कृति तक बदलती है विभिन्नता में एकता यही राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान है
हाल ही के वर्षों में यह देखा गया है कि जहां पर पहले अच्छी वर्षा होती थी अब वहां पर औसत से कम वर्षा होने लगी है और जहां पर पहले कम वर्षा होती थी अब वहा औसत से कुछ ज्यादा वर्षा होने लगी है
पर्यावरण विदों की नजर में इसके बहुत से कारण हैं उनमें से कुछ कारणों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है
महाराजा गंगा सिंह जी के अथक भागीरथी प्रयासों से हिमालय का पानी राजस्थान की भूमि में आने के बाद से गंगानगर बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थल क्षेत्रों में बहुत सुधार हुआ और लोगों का पर्यावरण के प्रति जुड़ाव भी एक महत्वपूर्ण कारण बना है  लोग प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक हुए हैं जिससे भूमि के उपजाऊ पन की क्षमता में भी वृद्धि हुई है और वन संपदा में भी काफी बढ़ोतरी हुई है जिससे तापमान में और मानसून के तंत्र में भी बहुत सुधार हुआ है उसी के उलट जिन क्षेत्रों में ज्यादा वर्षा होती थी वहां पर मानवीय तत्वों के अप्राकृतिक खनन से वर्षा तंत्र पर असर पड़ा है जिससे औसत से कम वर्षा होने लगी है
यही बदलाव कहीं पर निकट भविष्य में चिंता का विषय  और कहीं पर खुशहाली की उम्मीद लेकर आया है
इस मानसून काल मे अच्छी वर्षा की उम्मीद संजोए मैं देवेंद्र देव सभी को प्रणाम करता हूं

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